सुन्नी अवधारणाओं का सारांश दुनिया की हकीकत का एहसास यदि मानव आत्मा पृथ्वी से जुड़ी हुई है और इसके आकर्षणों के प्रति समर्पित है वह सांसारिक जीवन को बहुत विशाल मानती थी और इंसान को अपने जीवन के हर पल को जीने की आजादी लेकिन अगर आत्मा धरती से जुड़कर उससे ऊपर उठ जाए उसने अपने से परे देखा और दुनिया को वैसा ही देखा जैसा वह वास्तव में है इस संसार का जीवन व्यर्थ के आनंद के अलावा और कुछ नहीं है तब उसे एहसास हुआ कि उसके बाद के जीवन के बदले में उसका कोई मूल्य नहीं है क्या आप परलोक की अपेक्षा इस लोक के जीवन से अधिक संतुष्ट हैं? इस सांसारिक जीवन का परलोक में आनंद बहुत कम है सुन्नी अवधारणाओं का सारांश