सुन्नी अवधारणाओं का सारांश विश्वास ही विजय का कारण और हेतु है पाठ में कहा गया है कि भगवान की जीत विश्वासियों के लिए होगी यह इंगित करता है कि विश्वास ही ईश्वर की विजय का कारण और कारण है यदि नसरल्लाह अनुपस्थित या विलंबित है ऐसा कारण में कमी के कारण होता है आस्था महज़ एक निमंत्रण और दिखावा हो सकती है उसकी सच्चाई और उसके मुखबिर से रहित तब अविश्वास की वास्तविकता उस पर हावी हो जाती है क्योंकि किसी भी चीज़ की वास्तविकता उसके दिखावे से ज़्यादा मजबूत होती है भले ही वो अविश्वास का सच हो वह आस्था की अभिव्यक्ति थे लेकिन जब सच्ची आस्था जागती है यह झूठ को उसके सभी झूठ और धोखे से हरा देता है बल्कि, हम सत्य को असत्य पर उछालते हैं और वह उसे नष्ट कर देता है तो वह ऊब गया था