सुन्नी अवधारणाओं का सारांश विचार-विमर्श के वर्ष के लाभों और निर्णयों के बारे में विचार-विमर्श के वर्ष में लाभ होता है सबसे महत्वपूर्ण में से एक सबसे पहले यदि विश्वासी सदैव अविश्वासियों पर विजय पाते ईमानवालों के साथ दूसरे पाखंडी भी प्रवेश करेंगे उनमें कोई भेद नहीं था सर्वशक्तिमान ईश्वर ने कहा हम उन दिनों को लोगों के बीच बदलते रहते हैं और जो लोग विश्वास करते हैं उन्हें परमेश्वर बता दे अर्थात्, ईश्वर जो जानता है उसे अस्तित्व में प्रकट करना विश्वासियों के पूर्वज्ञान के साथ वे उन लोगों से अलग हैं जो ऐसा होने का दावा करते हैं पाखंडियों का सर्वशक्तिमान ईश्वर वह चीज़ों को घटित होने से पहले ही जानता है घटनाएँ ही इस ज्ञान को प्रकट करती हैं अस्तित्व में विचार-विमर्श से पता चलता है कि क्या छिपा है इसे लोगों के जीवन में साकार करें आस्था प्रत्यक्ष क्रिया में परिवर्तित हो जाती है पाखंड भी बदल गया है स्पष्ट व्यवहार के लिए फिर खाता और इनाम इससे संबंधित हैं सर्वशक्तिमान ईश्वर लोगों को जवाबदेह नहीं ठहराता उनके बारे में वह जो जानता है उसके अनुसार लेकिन उनके साथ जो हुआ उसके लिए वह उन्हें जिम्मेदार ठहराते हैं दूसरी बात भले ही काफ़िर हमेशा ईमानवालों पर विजय पाते हों मिशन और सन्देश का उद्देश्य पूरा नहीं हुआ इसलिए सर्वशक्तिमान ईश्वर की बुद्धि को इसकी आवश्यकता थी कभी-कभी विश्वासियों को अविश्वासियों की ओर ले जाना और अविश्वासियों ने उन्हें दूसरा दे दिया दोनों चीजें हासिल करने के लिए विश्वासियों को पाखंडियों से अलग करें और मिशन एवं सन्देश के उद्देश्य को प्राप्त करना