WEBVTT

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सुन्नी अवधारणाओं का सारांश

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विचार-विमर्श के वर्ष के लाभों और निर्णयों के बारे में

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विचार-विमर्श के वर्ष में लाभ होता है

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सबसे महत्वपूर्ण में से एक

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सबसे पहले

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यदि विश्वासी सदैव अविश्वासियों पर विजय पाते

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ईमानवालों के साथ दूसरे पाखंडी भी प्रवेश करेंगे

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उनमें कोई भेद नहीं था

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सर्वशक्तिमान ईश्वर ने कहा

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हम उन दिनों को लोगों के बीच बदलते रहते हैं

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और जो लोग विश्वास करते हैं उन्हें परमेश्वर बता दे

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अर्थात्, ईश्वर जो जानता है उसे अस्तित्व में प्रकट करना

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विश्वासियों के पूर्वज्ञान के साथ

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वे उन लोगों से अलग हैं जो ऐसा होने का दावा करते हैं

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पाखंडियों का

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सर्वशक्तिमान ईश्वर

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वह चीज़ों को घटित होने से पहले ही जानता है

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घटनाएँ ही इस ज्ञान को प्रकट करती हैं

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अस्तित्व में

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विचार-विमर्श से पता चलता है कि क्या छिपा है

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इसे लोगों के जीवन में साकार करें

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आस्था प्रत्यक्ष क्रिया में परिवर्तित हो जाती है

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पाखंड भी बदल गया है

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स्पष्ट व्यवहार के लिए

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फिर खाता और इनाम इससे संबंधित हैं

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सर्वशक्तिमान ईश्वर लोगों को जवाबदेह नहीं ठहराता

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उनके बारे में वह जो जानता है उसके अनुसार

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लेकिन उनके साथ जो हुआ उसके लिए वह उन्हें जिम्मेदार ठहराते हैं

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दूसरी बात

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भले ही काफ़िर हमेशा ईमानवालों पर विजय पाते हों

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मिशन और सन्देश का उद्देश्य पूरा नहीं हुआ

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इसलिए सर्वशक्तिमान ईश्वर की बुद्धि को इसकी आवश्यकता थी

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कभी-कभी विश्वासियों को अविश्वासियों की ओर ले जाना

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और अविश्वासियों ने उन्हें दूसरा दे दिया

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दोनों चीजें हासिल करने के लिए

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विश्वासियों को पाखंडियों से अलग करें

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और मिशन एवं सन्देश के उद्देश्य को प्राप्त करना
