सुन्नी अवधारणाओं का सारांश असहमति के मामले में "इनकार नहीं" वाली कहावत गलत है यह वाक्य ग़लत है ये कहना सही है इज्तिहाद के मामले में इनकार नहीं क्योंकि किसी मुद्दे में अंतर को उसके वैध प्रमाण के रूप में दिया जाता है जो कोई भी उनसे असहमत है उसकी निंदा की जानी चाहिए लेकिन बिना किसी विडंबना या शत्रुता के जहाँ तक इज्तिहाद के मामलों का सवाल है जिसके लिए कोई सबूत नहीं है इससे इनकार नहीं किया जा सकता