सुन्नी अवधारणाओं का सारांश झूठ पर अहंकार सर्वशक्तिमान ईश्वर ने कहा महिमा ईश्वर, उसके दूत और ईमानवालों की है, परन्तु कपटी लोग नहीं जानते। और सर्वशक्तिमान ईश्वर ने कहा और निर्बल न हो जाओ, और उदास न हो, क्योंकि यदि तुम ईमानवाले हो, तो प्रबल हो जाओगे। और असत्य पर अहंकार का स्रोत यह सर्वशक्तिमान ईश्वर में विश्वास है और उसकी आज्ञा के प्रति समर्पण कर दो क्योंकि झूठ परमेश्वर जो चाहता है उसके विपरीत है सत्य इससे ऊपर और परे है और सच्चाई बनी हुई है झूठ सर्वशक्तिमान ईश्वर के वादे पर आधारित है जहां तक झाग की बात है तो यह गायब हो जाता है जहां तक लोगों के हित की बात है तो वह धरी की धरी रह जाती है परमेश्वर दृष्टान्त भी स्थापित करता है और वह इसकी परवाह नहीं करता तो सर्वशक्तिमान ईश्वर! झूठ के प्रति अपनी बुद्धि से एक युग में फैलना कष्ट और भेदभाव के लिए लेकिन उसकी किस्मत चली गयी और बर्बाद हो गयी और विश्वास के द्वारा अहंकार इसका मतलब सिर्फ एक टॉर्क नहीं है कोई अति अभिमान नहीं है कोई जल्दबाज़ी, उतावला उत्साह नहीं यह सत्य पर आधारित अहंकार है अस्तित्व की स्थिर और केन्द्रित प्रकृति जिस पर आकाश और पृथ्वी स्थापित किये गये बल के तर्क के पीछे अधिकार रहता है और लोगों को जानना क्योंकि यह जीवित परमेश्वर से जुड़ा है जो मरता नहीं है