सुन्नी अवधारणाओं का सारांश प्रशासन एवं राजनीति में संयम हमें प्रबंधन और राजनीति के बहकावे में नहीं आना चाहिए।' इसके सैद्धान्तिक भाग में अतिशयोक्ति और अत्युक्ति के अतिरिक्त मामले के प्रभारी लोग योजना बनाने और सिद्धांत बनाने में डूबे हुए हैं जब तक दिन, महीने और यहाँ तक कि साल भी न बीत जाएँ वे अभी भी अपने सिद्धांत और अध्ययन में लगे हुए हैं वे एक पैर आगे बढ़ाते हैं और दूसरे को विलंबित करते हैं यह उन्हें काम करने से रोकता है वे उन अवसरों को गँवा देते हैं जो उनमें निवेश किए बिना उनके सामने आते हैं भले ही ऐसे लोगों की किस्मत में योजना और सिद्धांत बनाने की दिशा से आगे बढ़ना ही लिखा हो बल में आप उन्हें काम के आयोजन में डूबे हुए भी देखते हैं और इसकी पुख्ता व्यवस्था करें जिनमें से अधिकांश औपचारिक हो सकते हैं इससे सिर्फ काम में बाधा आती है और कार्यकर्ताओं को अपने दिमाग का इस्तेमाल करने से रोकें और कार्य एवं कार्यान्वयन में उनकी ऊर्जा हमें पिछली चेतावनी को भी नहीं लेना चाहिए प्रबंधन और संगठन के महत्व को कम आंकना किसी भी जानबूझकर, संगठित कार्रवाई का आरोप लगाना यह एक विधर्मी पक्षपातपूर्ण कृत्य है जिससे योजना और अध्ययन की उपेक्षा होती है और उसके बिना भी काम पर जा रहा हूँ फिर अराजकता फैल जाती है भ्रम उत्पन्न होता है इससे व्यर्थ में समय और धन की बर्बादी होती है बल्कि, यह प्रतिगमन की ओर ले जाता है राष्ट्र पिछड़ेपन की ओर लौटता है इसलिए, दृष्टि में संयम होना चाहिए योजना और आयोजन के लिए और कार्यान्वयन, अनुवर्ती और मूल्यांकन में दृढ़ता सुन्नी