WEBVTT

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सुन्नी अवधारणाओं का सारांश

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प्रशासन एवं राजनीति में संयम

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हमें प्रबंधन और राजनीति के बहकावे में नहीं आना चाहिए।'

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इसके सैद्धान्तिक भाग में अतिशयोक्ति और अत्युक्ति के अतिरिक्त

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मामले के प्रभारी लोग योजना बनाने और सिद्धांत बनाने में डूबे हुए हैं

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जब तक दिन, महीने और यहाँ तक कि साल भी न बीत जाएँ

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वे अभी भी अपने सिद्धांत और अध्ययन में लगे हुए हैं

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वे एक पैर आगे बढ़ाते हैं और दूसरे को विलंबित करते हैं

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यह उन्हें काम करने से रोकता है

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वे उन अवसरों को गँवा देते हैं जो उनमें निवेश किए बिना उनके सामने आते हैं

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भले ही ऐसे लोगों की किस्मत में योजना और सिद्धांत बनाने की दिशा से आगे बढ़ना ही लिखा हो

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बल में

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आप उन्हें काम की व्यवस्था में डूबे हुए भी देखते हैं

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और इसकी पुख्ता व्यवस्था करें

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जिनमें से अधिकांश औपचारिक हो सकते हैं

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इससे सिर्फ काम में बाधा आती है

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और कार्यकर्ताओं को अपने दिमाग का इस्तेमाल करने से रोकें

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और कार्य एवं कार्यान्वयन में उनकी ऊर्जा

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हमें पिछली चेतावनी को भी नहीं लेना चाहिए

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प्रबंधन और संगठन के महत्व को कम आंकना

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किसी भी जानबूझकर, संगठित कार्रवाई का आरोप लगाना

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यह एक विधर्मी पक्षपातपूर्ण कृत्य है

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जिससे योजना और अध्ययन की उपेक्षा होती है

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और उसके बिना भी काम पर जा रहा हूँ

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फिर अराजकता फैल जाती है

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भ्रम उत्पन्न होता है

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इससे व्यर्थ में समय और धन की बर्बादी होती है

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बल्कि, यह प्रतिगमन की ओर ले जाता है

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राष्ट्र पिछड़ेपन की ओर लौटता है

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इसलिए, दृष्टि में संयम होना चाहिए

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योजना और आयोजन के लिए

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और कार्यान्वयन, अनुवर्ती कार्रवाई और मूल्यांकन में दृढ़ता

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सुन्नी
