सुन्नी अवधारणाओं का सारांश सही होने का तर्क देने से पहले सिद्धांतों को ध्यान में रखा जाना चाहिए बहस से पहले वैज्ञानिक को उस व्यक्ति की ओर अवश्य देखना चाहिए जिससे वह बहस कर रहा है क्या वह निश्चितताओं और सिद्धांतों में विश्वास करता है, या वह उन पर विवाद भी करता है? यदि वह इस पर विश्वास नहीं करता तो शाखाओं के बारे में उससे बहस करने का कोई मतलब नहीं है यह समय की बर्बादी है वाद-विवाद करने वालों को तर्क-वितर्क की पद्धति पर भी सहमत होना चाहिए अन्यथा असहमति की खाई बढ़ती जाएगी और कोई नतीजा नहीं निकल पाएगा सुन्नी अवधारणाओं का सारांश