सुन्नी अवधारणाओं का सारांश झूठी गवाही के दो अर्थ होते हैं मिथ्यात्व कोई भी निषिद्ध कथन या कार्य है इसमें झूठ बोलना और बदनामी शामिल है शाहदा का मूलतः अर्थ उपस्थिति है और इस से सर्वशक्तिमान परमेश्वर का वचन निकलता है तुम में से जो कोई इस महीने का गवाह बने, वह रोज़ा रखे यानी, आपमें से उन लोगों के लिए जिन्होंने इस महीने में भाग लिया है गवाही का तात्पर्य किसी चीज़ की रिपोर्ट करना भी है और इस से सर्वशक्तिमान परमेश्वर का वचन निकलता है उसके परिवार के एक गवाह ने गवाही दी कि उसकी शर्ट क्षतिग्रस्त हो गई थी इसलिए मैंने सच कहा, और वह झूठ बोलने वालों में से एक था भले ही उसकी शर्ट पीछे से फटी हुई हो इसलिए मैंने झूठ बोला और वह सच्चे लोगों में से एक था और सर्वशक्तिमान ईश्वर कहते हैं और जो लोग झूठी गवाही नहीं देते यदि वे बेकार की बातों से गुजरते हैं, तो वे सम्मान से गुजरते हैं इसमें सभी हितधारक शामिल हैं परम कृपालु के बन्दे किसी के विरुद्ध झूठी गवाही नहीं देते इस अर्थ में मिथ्यात्व का प्रयोग वस्तु को हटाने के सन्दर्भ में किया जाता है और प्रशंसा झूठी गवाही नहीं देती वे झूठ और झूठ की सभाओं में भी नहीं जाते इस अर्थ में असत्य एक वस्तु है आस्तिक को झूठ और बदनामी दोनों से सावधान रहना चाहिए और झूठ और झूठ की महफ़िलों में जा रहे हो वे दोनों निंदनीय प्राणी हैं जो विश्वासियों की विशेषताओं में से नहीं हैं