सुन्नी अवधारणाओं का सारांश फैसलों की निरंतरता और फतवों में अंतर के बीच अंतर शरीयत के प्रावधान तय हैं, बदलते नहीं चाहे समय, स्थान, परिस्थितियाँ या रीति-रिवाज कैसे भी बदल जाएँ लेकिन जो बदलाव हो सकता है वो है फतवा शासन और उससे संबंधित विषयों के संदर्भ में परिवर्तन के अनुसार यानी, फतवे का फैसला इसके बाहर और इससे जुड़ी किसी और चीज के आधार पर बदल सकता है इसने फैसले के आधार को नहीं बदला, बल्कि यह इसके संदर्भ और संदर्भ में बदलाव के आधार पर बदल गया उदाहरण के लिए, अंगूर बेचना मूलतः एक समाधान है यह अपने मूल में एक निश्चित निर्णय है परन्तु यदि वह जानता कि जो कोई अंगूर मोल लेगा, वह उसे दाखमधु में बदल देगा ऐसे में उसे बहाने के तौर पर बेचना जायज़ नहीं है तथा पाप और आक्रमण में सहयोग करने से मना किया है विशेष रूप से इस व्यक्ति को बेचना मना है उससे जुड़ी एक शर्त है जो उसे बेचने से रोकती है जहाँ तक सामान्य तौर पर अंगूर बेचने की बात है यह उन लोगों के लिए अनुमेय रहेगा जिनके पास यह कारण नहीं है सुन्नी अवधारणाओं का सारांश