सुन्नी अवधारणाओं का सारांश संवाद के माध्यम से वकालत संवाद सत्य को व्यक्त करने के उपयोगी तरीकों में से एक है यह आमतौर पर दो पक्षों के बीच होता है संवाद समीक्षा है यानी एक या दोनों पक्ष वह दूसरे को वही लौटाने का प्रयास करता है जिसे वह सत्य के रूप में देखता है ये दो प्रकार के होते हैं सबसे पहले विद्वान और शिक्षार्थी के बीच संवाद इसमें विद्वान का उद्देश्य सत्य की व्याख्या करना है इससे अनभिज्ञ लोगों के लिए अपने साक्ष्य के साथ आमतौर पर शिक्षार्थी समर्पण करता है दुनिया क्या कहती है दूसरी बात किसी मामले को लेकर दो अलग-अलग पक्षों के बीच बातचीत इसमें दोनों को दिखाया गया है उनके पास जो सबूत हैं, उससे उनकी स्थिति सही है इस संवाद का लक्ष्य प्रत्येक पक्ष दूसरे को साक्ष्य सहित अपनी राय देने के लिए आमंत्रित करता है इसे सफल माना जाता है यदि दोनों पक्ष एक राय पर सहमत हों या वे सहमत नहीं थे लेकिन यह प्रत्येक पक्ष के लिए स्पष्ट है जिस बात पर असहमति है उस पर विवाद हो सकता है इससे विभाजन और प्रतिद्वंद्विता नहीं होती जैसे इज्तिहाद के मामले में लाभ और हानि के आकलन में अंतर सुन्नी अवधारणाओं का सारांश