सुन्नी अवधारणाओं का सारांश तप और धर्मपरायणता की परिभाषा तपस्या और धर्मपरायणता दोनों को परिभाषित करने के बारे में कही गई सबसे अच्छी बातों में से एक शेख अल-इस्लाम इब्न तैमियाह का कथन परलोक में जो उपयोगी नहीं है उसका त्याग करना ही संन्यास है धर्मपरायणता उस चीज़ को त्यागना है जिसके बारे में किसी को डर है कि इससे उसके बाद के जीवन में नुकसान होगा इसलिए तप धर्मपरायणता से भी ऊंचा है क्योंकि धर्मात्मा मनुष्य परलोक में वह वस्तु ग्रहण कर सकता है जो लाभदायक न हो जब तक कोई नुकसान न हो और तदनुसार प्रत्येक तपस्वी धर्मनिष्ठ है हर धर्मात्मा व्यक्ति तपस्वी नहीं होता सुन्नी अवधारणाओं का सारांश